2 लाख रूपये चैक लगाकर राशि मांगन हेतु लगाया था माननीय न्यायालय में केसशिवपुरी-एक दूसरे से जान पहचान होने के कारण दिए गए 2 लाख रूपये की राशि का चैक के मामले में परिवादी के द्वारा कोई लिखा-पढ़ी नहीं की गई और जिसे चैक दिए वह अभियुक्त भी परिवादी को जानता पहचानता तक नहीं, ऐसे में 2 लाख रूपये के इस चैक बाउंस के मामले में माननीय माननीय न्यायिक मजिस्टे्रट प्रथम श्रेणी धर्मवीर सिंह राठौर के द्वारा प्रकरण की विवेचना उपरांत चैक बाउंस के आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव के आधार पर दोषमुक्त करार दिया गया। इस प्रकरण में अभियुक्त की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक भार्गव के द्वारा की गई।
परिवाद के अनुसार अभियुक्त प्रमोद कुमार अष्ठाना पुत्र काशीनाथ अष्ठाना निवासी कलेक्टर बंगला के पास शिवपुरी ने धर्मेन्द्र यादव पुत्र रामजी लाल यादव निवासी ग्राम सेसई हाल निवासी अहीर मोहल्ला, पुरानी शिवुपरी से परिचित होने के चलते अपनी पारिवारिक एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 2 लाख रूपये बतौर उधार ऋण के रूप में दिनांक 01.06.2019 को लिए थे और कहा था कि चार माह में लोन पास होने पर उक्त रूपये परिवादी धर्मेन्द्र को वापस करने का आश्वासन दिया था और उक्त वायदे के एवज में परिवादी धर्मेन्द्र ने अभियुक्त प्रमोद कुमार अष्ठाना से 01.10.2019 को 2 लाख रूपये की मांग हेतु बैंक पंजाब नेशनल बैंक शाखा शिवपुरी का चैक प्रदत्त किया था कि वह उक्त राशि को प्राप्त करने के लिए बैंक में चैक लगा दे।
जब परिवादी को पैसों की आवश्यकता हुई तो उसने दिया गया चैक सेन्ट्रल बैंक शाखा शिवपुरी में भुगतान हेतु दिया जिस पर बैंक के द्वारा एकाउंट क्लोजड की टीप केसाथ बिना भुगतान के चैक 07.10.2019 को वापस हो गया। इस पर अभियुक्त प्रमोद अष्ठाना के द्वारा परिवादी धर्मेन्द्र को दिए गए गए चैक बाउंस होने के उपरांत परिवादी द्वारा अपने अभिभाषक के माध्यम से 12.10.2019 को अभियुक्त को पत्र भेजा। लेकिन यहां अभियुक्त प्रमोद कुमार अष्ठाना के द्वारा अपने अभिभाषक दीपक भार्गव के माध्यम से माननीय न्यायालय को बताया कि अभियुक्त प्रमोद अष्ठाना परिवादी धर्मेन्द्र यादव को नहीं जानता और ना ही उसने किसी प्रकार का चैक परिवादी धर्मेन्द्र यादव को दिया जबकि उक्त चैक शालिनी पत्नि मनोज गौड़ के नाम से चैक था और इस चैक को वैरीफाई के लिए बैंक मैनेजर के कथन भी कराए गए।
इस पूरे मामले को माननीय न्यायिक मजिस्टे्रट प्रथम श्रेणी धर्मवीर सिंह राठौर के समक्ष यह तथ्य प्रस्तुत किए कि अभियुक्त प्रमोद कुमार अष्ठाना के द्वारा किसी भी प्रकार का कोई चैक और राशि का लेन-देन परिवादी धर्मेन्द्र यादव के साथ नहीं है, इस तरह पूरे प्रकरण की विवेचना उपरांत माननीय न्यायालय के द्वारा मामला संदेह पूर्ण पाया और अभियुक्त प्रमोद अष्ठाना को धारा 138 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध के आरोप से पर्याप्त साक्ष्य के अभाव के आधार पर दोषमुक्त करार दिया गया। इस प्रकरण में अभियुक्त की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक भार्गव के द्वारा की गई।

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