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Monday, February 23, 2026

मोबाईल एप के सहारे वन विभाग ने की गिद्धों की महत्वपूर्ण गणना, जिले में पाए गए 735 गिद्ध


शिवपुरी-
वन विभाग के द्वारा इन दिनों मोबाईल ऐप के सहारे गिद्धों की गणना का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद गिद्धों की गणना की गई जिसमें 735 गिद्धों को जिले में जीवित पाया गया है। यहां विशेष मोबाइल से एप्प के माध्यम से गिद्धों के यह शानदार फोटो सतनवाड़ा वन परिक्षेत्र अधिकारी माधव सिंह सिकरवार द्वारा खींचे गए, जिसमें बताया कि जो गिद्ध पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वह मृत पशुओं के अवशेषों को शीघ्रता से साफ कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने एवं संक्रामक रोगों का प्रसार रोकने में सहायक होते हैं

जिले के वन विभाग के मैदानी अमले एवं अधिकारियों द्वारा प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना के प्रथम चरण के अंतर्गत हाल ही में गिद्धों की गणना का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया वन विभाग में पहली बार यह गणना ईपीओकलेक्ट 5 मोबाइल ऐप के माध्यम से की जिससे सर्चिंग के अनुसार शिवपुरी जिले में कुल 735 गिद्ध पाए गए हैं जो यह दर्शाता है कि क्षेत्र में गिद्धों की आबादी स्थिर और सुरक्षित है इनमें मुख्तय: इंडियन लॉन्ग बि ल्ड वल्चर, किंग वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, यूरेशियन ग्रिफन, हिमालय ग्रिफन प्रजातियां पाई गई इस वर्ष की गणना में जिले के अंतर्गत विशेष रूप से माधव टाइगर रिजर्व, सतनवाड़ा, पोहरी, शिवपुरी के वन क्षेत्रों में गिद्धों की सर्वाधिक सघन आबादी देखी गई है विशेष मोबाइल से एप्प के माध्यम से गिद्धों के यह शानदार फोटो सतनवाड़ा वन परिक्षेत्र अधिकारी माधव सिंह सिकरवार द्वारा खींचे गए गिद्ध पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वे मृत पशुओं के अवशेषों को शीघ्रता से साफ कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने एवं संक्रामक रोगों का प्रसार रोकने में सहायक होते हैं।

मध्यप्रदेश में गिद्धों की सर्वाधिक आबादी होने के साथ गिद्ध राज्य का गौरव किया है प्राप्त
ज्ञात हो कि 2000 के दशक की शुरुआत में देशभर में प्रकृति के इन सफाई कर्मियों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से भारी गिरावट आई थी इसका प्रमुख कारण मवेशियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनेक का उपयोग था इस दवा से उपचारित मृत पशुओं का मांस खाने के कारण गिद्धों में किडनी फेल होने की समस्या उत्पन्न होने से भारी संख्या में उनकी मौत हुई स्थिति की गंभीरता को देखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार पशु चिकित्सा में डाइक्लोफे नेक के उपयोग पर पूर्णत प्रतिबंध लगा दिया गया, इसके पश्चात मध्य प्रदेश शासन और वन विभाग के अथक प्रयासों का ही फल है कि आज गिद्धों के रहवास, संरक्षण और आबादी में शानदार सुधार हुआ है और पूरे देश में मध्य प्रदेश में गिद्धों की सर्वाधिक आबादी होने के साथ गिद्ध राज्य का गौरव प्राप्त कर चुका है शिवपुरी जिले का वन विभाग इन दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण, संवर्धन और उनके प्राकृतिक आवासों को संरक्षित रखने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है और आमजन से अपील करता है कि गिद्धों के संरक्षण में सहयोग प्रदान करें तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में अनावश्यक हस्तक्षेप ना करें।

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