सिख समाज में उत्साह, सपरिवार शामिल होकर पुण्य लाभ करेंगें अर्जित, आज कबड्डी का महामुकाबलाशिवपुरी- जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर स्थित प्रसिद्ध सिख समाज के धार्मिक स्थल पडोरा स्थित गुरुद्वारा में भव्य होला महल्ला का आयोजन किया जा रहा है जिसमें पावन सानिध्य सिख समाज के आस्था का केंद्र संत बाबा हाकिम सिंह रहेंगे जिनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। इस आयोजन में दूर दराज से बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग सपरिवार शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगें।
होला महल्ला में गुरू की अमृतवाणी के साथ होगा कबड्डी का महा मुकाबला
संत बाबा हाकम सिंह जी और संत बाबा सुख्खा सिंह जी के पावन सानिय में यह समागम सोमवार से अपनी पूर्ण दिव्यता के साथ प्रारंभ हुआ। सर्वप्रथम अलसुबह 3:15 बजे गुरुवाणी की अमृत वर्षा हुई, तो मानो प्रकृति भी उस दिव्य नाद में अपनी लय मिलाती हुई नजर आई। होला महल्ला का सौंदर्य इसकी विविधता में है। एक और जहां गुरुवार को अमृत संचार के माध्यम से प्राणी गुरु के चरणों से जुड़कर अपनी आत्मा का कल्याण करेंगे, तो वहीं दूसरी ओर बुधवार को पंजाब की मिट्टी की सौंधी महक लिए कबड्डी का महामुकाबला होगा। पंजाब के विख्यात स्पोर्ट्सों क्लबों के खिलाडी जब मैदान में उतरेंगे, तो वह केवल एक खेल नहीं, बल्कि दशमेश पिता द्वारा सिखाई गई शारीरिक दक्षता और अनुशासन का प्रदर्शन होगा।
अमृतसर की पावन धरा से पधार रहे ज्ञानी सरबजीत सिंह करेंगें अमृतवाणी का पाठ
इस भव्य आयोजन की छटा तब और निखर उठतों है जब पथ के शिरोमणि विद्वान अपनी वाणी से झतिहास के पन्नों को जीवंत कर रहे है, अमृतसर की पवित्र धरती से पधार रहे ज्ञानी सरबतीत सिंह जी टोटिया और अन्य कथावाचक गुरु इतिहास का बखान कर रहे हैं, यहां श्रोतओं के हृदय में श्रद्धा के भाव आए, वहीं जब ढ़ाड़ी और कविशर जत्थे वीर रस की तान छेड़ रहे तो प्रतीत होता है कि हवाओं में भी खालसा पथ के शौर्य और बलिदान की गूंज चहुंचओर सुनाई दे रही है।
इस भव्य आयोजन की छटा तब और निखर उठतों है जब पथ के शिरोमणि विद्वान अपनी वाणी से झतिहास के पन्नों को जीवंत कर रहे है, अमृतसर की पवित्र धरती से पधार रहे ज्ञानी सरबतीत सिंह जी टोटिया और अन्य कथावाचक गुरु इतिहास का बखान कर रहे हैं, यहां श्रोतओं के हृदय में श्रद्धा के भाव आए, वहीं जब ढ़ाड़ी और कविशर जत्थे वीर रस की तान छेड़ रहे तो प्रतीत होता है कि हवाओं में भी खालसा पथ के शौर्य और बलिदान की गूंज चहुंचओर सुनाई दे रही है।
होला महल्ला कोई उत्सव नहीं बल्कि गौरवशाली परपंरा का पनुर्जीवन का प्रमाण
जिले की तहसील कोलारस के समीप बंगला पड़ोरा संत बाबा हाकिम सिंह गुरुद्वारे की वह माटी जो स्वयं प्रगति और तपस्या की गवाह रही है, जहां सिखें के दसवें गुरू हिन्द की चादर साहिब गुरू गोविन्द सिंह जी महाराज के खालसायी तेज से आलोकित हो रही है। दल बाबा रामसिंह जी जत्थेबंदी और सम्प्रदाय कार सेवा संत बाबा तारा सिंह जी कृपा से गुरूद्वारा भाई बालाजी में आयोजित होल्ला महल्ला यह कोई एक उत्सव नहीं बल्कि उस गौरवशाली परंपरा का पुनर्जीवन है जहां भक्ति की कोमलता और शक्ति की दृढ़ता एक-दूसरे में विलीन हो जाती है। यहां आनंदपुर साहिब के उस ऐतिहासिक कालखंड की याद दिलाती है, जब दशमेश पिता ने सिखी की केवल जप-तप ही नहीं, बांटेक शस्त्र और शास्त्र के सतुलन का मार्ग दिखाया था।
जिले की तहसील कोलारस के समीप बंगला पड़ोरा संत बाबा हाकिम सिंह गुरुद्वारे की वह माटी जो स्वयं प्रगति और तपस्या की गवाह रही है, जहां सिखें के दसवें गुरू हिन्द की चादर साहिब गुरू गोविन्द सिंह जी महाराज के खालसायी तेज से आलोकित हो रही है। दल बाबा रामसिंह जी जत्थेबंदी और सम्प्रदाय कार सेवा संत बाबा तारा सिंह जी कृपा से गुरूद्वारा भाई बालाजी में आयोजित होल्ला महल्ला यह कोई एक उत्सव नहीं बल्कि उस गौरवशाली परंपरा का पुनर्जीवन है जहां भक्ति की कोमलता और शक्ति की दृढ़ता एक-दूसरे में विलीन हो जाती है। यहां आनंदपुर साहिब के उस ऐतिहासिक कालखंड की याद दिलाती है, जब दशमेश पिता ने सिखी की केवल जप-तप ही नहीं, बांटेक शस्त्र और शास्त्र के सतुलन का मार्ग दिखाया था।
होगी निष्काम सेवा, होगा गुरू का अटूट लंगर
सेवा की प्राकाष्ठा इस समागम का सबसे हृदयस्पर्शी पहलू है। शिवपुरी, अशोकनगर और कोलारस की संगत द्वारा निभाई जाने वाली निष्काम सेवा चाहे वह जोड़े घर की हो या लंगर की अमीर-गरीब के भेद की मिटाकर मानवता का सच्चा पाठ पढ़ाती है। गुरु का अटूट लंगर इस बात का प्रमाण है कि गुरु के द्वार पर कोई भूखा नहीं रहता और न ही कोई पराया होता है। इस पावन अवसर पर समूचा शिवपुरी जिला एक अध्यामिक परिवार के रूप में तब्दील हो गया है। मर्यादा और अनुशासन की परिधि में बंधा यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि धर्म केवल रस्मों में नही, बरिया आचरण की शुद्धता में है। आइए, भक्ति और शक्ति के इस विराट कुंभ में डुबकी लगाकर अपने जीवन को कृतार्थ करें और गुरु की खुशियों के भागीदार बने।
सेवा की प्राकाष्ठा इस समागम का सबसे हृदयस्पर्शी पहलू है। शिवपुरी, अशोकनगर और कोलारस की संगत द्वारा निभाई जाने वाली निष्काम सेवा चाहे वह जोड़े घर की हो या लंगर की अमीर-गरीब के भेद की मिटाकर मानवता का सच्चा पाठ पढ़ाती है। गुरु का अटूट लंगर इस बात का प्रमाण है कि गुरु के द्वार पर कोई भूखा नहीं रहता और न ही कोई पराया होता है। इस पावन अवसर पर समूचा शिवपुरी जिला एक अध्यामिक परिवार के रूप में तब्दील हो गया है। मर्यादा और अनुशासन की परिधि में बंधा यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि धर्म केवल रस्मों में नही, बरिया आचरण की शुद्धता में है। आइए, भक्ति और शक्ति के इस विराट कुंभ में डुबकी लगाकर अपने जीवन को कृतार्थ करें और गुरु की खुशियों के भागीदार बने।

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