जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम ने सुनाया फैसला, बीमा क्लेम की पूर्ण राशि 32,88,748 रुपये का भुगतान के आदेशशिवपुरी- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम में प्रकरण क्रमांक 208/2022 (श्रीमती मुन्नी देवी विरुद्ध आई.सी.आई.सी.आई. लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एवं अन्य) एक महत्वपूर्ण निर्णय में, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, शिवपुरी (म.प्र.) अध्यक्ष श्री सुरेश कुमार चौबे की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा, एक होम लोन सुरक्षा बीमा प्रकरण में आई.सी.आई.सी.आई. लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है।
यह परिवाद 71 वर्षीय श्रीमती मुन्नी देवी द्वारा दायर किया गया था, जिनके मृत पुत्र स्व. आलोक कुमार भार्गव ने पी.एन.बी. हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से 39,22,000 रुपये का हाउसिंग लोन लिया था। इस ऋण की सुरक्षा हेतु मृतक ने 25 अक्टूबर 2018 को आई.सी.आई.सी.आई. लोम्बार्ड से 32,88,748 रुपये की बीमा पॉलिसी खरीदी थी, जिसमें उनकी माता (परिवादी) को नॉमिनी बनाया गया था। 11 फरवरी 2021 को बीमित व्यक्ति (पुत्र) की मृत्यु हो जाने के बाद, परिवादी ने बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया। बीमा कंपनी ने 29 जून 2022 को यह कहकर दावा निरस्त कर दिया कि मृत्यु का कारण पॉलिसी में वर्णित मेजर मेडिकल इल्निस एण्ड प्रोसीजर की श्रेणी में नहीं आता है।
दस्तावेजों और मृत्यु रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद, फोरम ने पाया कि मृतक की मृत्यु सरीब्रल ओएडेमा विथ इंट्रा पुलमोनरी हेमरेजÓ से हुई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह कारण बीमा पॉलिसी की शर्तों के अंतर्गत मस्तिष्काघात जिसके परिणामस्वरूप स्थायी लक्षण उत्पन्न हो की श्रेणी में आता है, अर्थात मृत्यु बीमा शर्तों के अधीन ही हुई थी। फोरम ने माना कि बीमा कंपनी द्वारा अनुचित कारणों से क्लेम निरस्त करना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी को दर्शाता है।
परिणामस्वरूप, फोरम ने आई.सी.आई.सी.आई. लोम्बार्ड को यह आदेश दिया है कि वह आदेश दिनांक से दो माह के भीतर परिवादी को बीमा क्लेम की पूर्ण राशि 32,88,748 रुपये का भुगतान करे। इस राशि पर दावा निरस्त करने की तिथि से अदायगी तक 7 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देय होगा। इसके अतिरिक्त, फोरम ने बीमा कंपनी को परिवादी को हुई शारीरिक व मानसिक परेशानी, अभिभाषक शुल्क और वाद व्यय के रूप में कुल 10,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। प्रकरण में परिवादी की पैरवी अंचित जैन, अधिवक्ता कृतिका जैन द्वारा की गई थी।

No comments:
Post a Comment