---------------------------------News Website By 𝐑𝐚𝐣𝐮 𝐘𝐚𝐝𝐚𝐯--------------------------------

𝙎𝙝𝙞𝙫𝙥𝙪𝙧𝙞 𝙆𝙝𝙖𝙗𝙖𝙧

Monday, July 13, 2026

आत्मबोध से विश्वबोध की और बढऩे का मार्ग साहित्य और संस्कृति से प्रशस्त होता है : पवनपुत्र बादल




साहित्य परिषद का आत्मबोध से विश्वबोध व्याख्यान माला भव्यता के साथ संपन्न

शिवपुरी-व्यक्ति को अगर  आगे बढऩा  है,स्वयं के जीवन को सार्थक बनाना है तो आत्मकेंद्रित ही होना होगा।उक्त उदगार अखिल भारतीय साहित्य परिषद शिवपुरी द्वारा आयोजित आत्मबोध से विश्वबोध व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता की आसंदी से साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री लखनऊ से पधारे, डॉ पवनपुत्र बादल ने व्यक्त किए। डॉ पवनपुत्र बादल ने इस अवसर पर कहा कि साहित्य और संस्कृति से ही व्यक्ति का आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त होता है,तभी विश्वबोध की और व्यक्ति बढ़ सकता है।इतने वर्षों तक घातो, आघातों, प्रतिघातों को झेलने के वाबजूद अगर आज सनातन संस्कृति न सिर्फ बची हुई बल्कि विश्व का मार्ग दर्शन कर रही है तो उसके मूल में साहित्य और संस्कृति ही है। इस देश का दुर्भाग्य है कि कभी नारी के नाम पर तो कभी फूहड़ कार्यक्रमों के माध्यम से परिवारों को तोडऩे के कुचक्र चल रहे है,तब व्यक्ति को अपने मूल संस्कारों,संस्कृति को समझने और उन्हें विकसित करने की।आवश्यकता है,और इसके लिए साहित्य ही सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।

मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में मौजूद भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के उप महानिरीक्षक राजीव लोचन शुक्ल ने कहा कि विश्व का एकमात्र देश भारत ही है जो पूरे विश्व को परिवार कहता है,संकीर्णता नहीं उदारता पर विश्वास करता है। वाल्मीकि कृत रामायण हो या बाबा तुलसीदास कृत रामचरितमानस इनके माध्यम से समाज में नैतिकता को स्थापित करने का ज्ञान और पशु पक्षियों के प्रति भी आत्मीयता का भाव प्रकट होता है। हमारी संस्कृति में चींटी से लेकर मानव तक को एक परमपिता परमात्मा के द्वारा उत्पन्न होना बताया गया है,सभी को जीवन जीने का मंत्र दिया गया है। यह विराट संस्कृति वसुधा को परिवार कहती है,यही इसकी विशालता और विराटता है। 

कार्यक्रम का संचालन कर रहे आशुतोष ओज ने कार्यक्रम की रूपरेखा सर्वप्रथम प्रकट करते हुए कहा कि पिछले एक माह से साहित्य की समस्त विधाओं,कला संस्कृति से जुड़े हुए लोगों की लिटरली मैपिंग का कार्य हमने प्रारंभ किया,जगह जगह संपर्क किया और शिवपुरी में पहली बार साहित्य की समस्त विधाओं के लोगो को एक छत के नीचे एकत्रित करने में सफलता प्राप्त की। इस कार्यक्रम में संभाग भर के साहित्यकार मौजूद है ये इस कार्यक्रम की विशिष्टता को प्रकट करता है। कार्यक्रम में साहित्यकारों, लेखक, संगीतकार, गीतकार, चित्रकार, मांडना, समाज सेवियों, विद्यार्थियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित भी किया। परिषद गीत श्याम बिहारी सरल, अतिथि परिचय प्रदीप अवस्थी और आभार प्रदर्शन अशोक मोहिते ने किया।

No comments: