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Tuesday, August 4, 2026

आचार्य आनंद ऋषि जी की 126 जयंती 5 दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाई जाएगी


साध्वी प्रमोद कुंवर जी के सानिध्य में 9 से 13 अगस्त तक पोषद भवन में होंगे धार्मिक कार्यक्रम

शिवपुरी-शिवपुरी में चार्तुमास कर रही प्रसिद्ध जैन साध्वी प्रमोद कुंवर जी महाराज ठाणा तीन के सानिध्य में स्थानकवासी जैन समाज के आचार्य आनंद ऋषि जी महाराज की 126 वीं जन्म जयंती पोषद भवन शिवपुरी में पांच दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाई जाएगी। यह कार्यक्रम 9 अगस्त से 13 अगस्त तक चलाऐंगे तथा अंतिम दिन 13 अगस्त को आचार्य आनंद ऋषि महाराज के व्यक्तित्व पर गुणानुवाद सभा के माध्यम से प्रकाश डाला जाएगा।

स्थानकवासी जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कोचेटा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शिवपुरी के ओसवाल गली स्थित पोषद भवन में प्रसिद्ध जैन साध्वी प्रमोद कुंवर जी, साध्वी चेतना जी और साध्वी स्मिता जी का चातुर्मास चल रहा है। चार्तुमास के अवसर पर प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक प्रवचन और दोपहर में महिलाओं के लिए धार्मिक कक्षाओं का आयोजन चल रहा है। इसी कड़ी में परम पूज्य आचार्य सम्राट गुरूदेव श्री आनंद ऋषि जी महाराज की 126 वीं जन्म जयंती पांच दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाने का निर्णय लिया गया है। पांच दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के तहत 9 अगस्त रविवार को सुबह 9-10 बजे तक पोषद भवन में लोगस्स का पाठ धर्मप्रेमी बन्धुओं और बहनों द्वारा किया जाएगा। 

धर्म प्रेमियों से अपील की गई है कि लोगस्स के जाप में पुरुष सफेद एवं महिलाएं केसरिया परिधान धारण करें। 10 अगस्त सोमवार को सामायिक दिवस घोषित किया गया है। इस अवसर पर धर्मप्रेमी लोग सुबह से 3 सामायिक अनिवार्य रूप से से करेंगे। इसे सामायिक का तेला नाम दिया गया है। 11 अगस्त मंगलवार को वंदना दिवस को सुबह 9 से 10 बजे तक वंदना दिवस मनाया जाएगा तथा 12 अगस्त को सुबह 9 से 10 बजे तक नवकार महामंत्र का जाप आयोजित होगा और इसी दिन धर्मप्रेमी आयमिल वृत्त करेंगे। आय मिल व्रत महिला मंडल द्वारा आयोजित किया जा रहा है। जैन धर्म में इस व्रत की महिमा बहुत मानी जाती है और इसे रस परित्याग तपस्या कहा जाता है। 13 अगस्त को गुरू महाराज की गुणनुवाद सभा होगी। जिसमें आचार्य आनंद ऋषि जी महाराज के सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन पर प्रकाश डाला जाएगा।

आचार्य जी ने 13 वर्ष की उम्र में लिया था संन्यास
स्थानकवासी श्रमण संघ के आचार्य आनंद ऋषि जी महाराज का जन्म 27 जुलाई 1900 को महाराष्ट्र के चिंचौड़ी ग्राम में हुआ था। उनके जन्म का नाम नेमीचंद था। बचपन से ही धर्म में उनकी रुचि थी और वह कम उम्र में ही धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने लगे थे। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने आचार्य रत्न ऋषि जी महाराज से दीक्षा प्राप्त की थी। दीक्षा संस्कार 7 दिसंबर 1913 को अहमदनगर जिले के मीरी में हुआ था। उन्होंने दीक्षा लेते ही संस्कृत और प्राकृत स्त्रोत्रों का अध्ययन पूर्ण कर लिया था और पहल प्रवचन 1920 में दिया। उनके गुरु ने उन्हें सीख दी थी कि जीवन में कभी में दुखी मत होना और हमेशा मानव जाति के कल्याण के लिए कार्र्य करना और उन्होंने इस सीख को पूरी तरह से अपने जीवन में उतारा। 

13 फरवरी 1975 को महाराष्ट्र के उस समय के मुख्यमंत्री वसंतराव नायक ने उन्हें राष्ट्र संत की उपाधि से सम्मानित किया। 1964 से 1992 में अपनी मृत्यु तक उन्होंने वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के आचार्य पद के महत्वपूर्ण दायित्व को संभाला और इसका पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया। आचार्य जी के बारे में एक दिव्य बात यह भी थी कि उनके पैर के मध्य में पद्म चिन्ह था। वे इसे केवल उन्हीं भक्तों को दिखाते थे जो अपनी किसी भी बुरी आदत के निषेध के लिए तैयार होता था। भारत सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट का प्रकाशन भी किया। वह कई शैक्षणिक संस्थानों के संस्थापक रहे और अहमद नगर में उनके द्वारा स्थापित आनंद धाम मानव सेवा का आज एक प्रसिद्ध तीर्थ बन चुका है। जहां अस्पताल, नेत्रालय और रक्त बैंक संचालित किए जा रहे हैं। 28 मार्च 1992 को अहमदनगर में अपनी मृत्यु से पहले उन्होंने संचार लेकर मृत्यु को वरण किया।

माँ की स्मृति में पांच को भक्तामर पाठ का आयोजन आज
पोषण भवन में साध्वी प्रमोद कुंवर जी महाराज ठाणा तीन के सानिध्य में सांखला परिवार द्वारा अपनी माँ श्रीमती कमला देवी धर्मपत्नी स्व. इन्दरमल जी सांखला की पुण्य स्मृति में भक्तामर पाठ एवं नवकार महामंत्र का जाप 5 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। सांखला परिवार के तेजमल सांखला, डॉ. दीपक सांखला, अशोक सांखला और श्रेयांश सांखला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 5 अगस्त को पोषद भवन में सुबह 9 से 9:30 बजे तक साध्वी जी महाराज के व्याख्यान होंगे और सुबह 9:30 बजे से भक्तामर पाठ का आयोजन रखा गया है। धर्म प्रेमियों से इस आयोजन में भाग लेने की अपील सांखला परिवार ने की है।

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