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Monday, August 31, 2026

इस्कॉन से जुड़कर 13 वर्ष की उम्र में 50 ग्रंथों के वक्ता बने मधुकंठ दास को मिला वल्र्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस सम्मान



शिवपुरी।
आध्यात्मिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिवपुरी के मूल निवासी एवम पिछले लंबे समय से वृंदावन में प्रभुसेवा में लीन मधुकंठ दास (माधव दुबे) को वल्र्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस इंग्लैंड की ओर से सम्मानित किया गया है। संस्था द्वारा जारी प्रमाण-पत्र के अनुसार उन्हें कम उम्र में आध्यात्मिक साधना, भक्ति और श्रीकृष्ण की सेवा के प्रति समर्पण के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया है।

प्रमाण-पत्र में मधुकंठ दास को दुनिया के सबसे कम उम्र के इस्कॉन वक्ता के रूप में उल्लेखित किया गया है। प्रमाण-पत्र के अनुसार उन्होंने महज 13 वर्ष की आयु में इस्कॉन की शिक्षाओं एवं सिद्धांतों को अपनाते हुए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की और भक्ति, आध्यात्मिक अनुशासन तथा भगवान श्रीकृष्ण की सेवा के प्रति निरंतर समर्पण बनाए रखा। मधुकंठ दास वर्तमान में 50 ग्रंथों के वक्ता के रूप में आध्यात्मिक विषयों पर लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश पहुंचा रहे हैं। कम उम्र में उनकी आध्यात्मिक सक्रियता और वक्तृत्व क्षमता को प्रमाण-पत्र में युवाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बताया गया है। 

वल्र्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस इंग्लैंड के अध्यक्ष हेनरी आर. द्वारा जारी इस प्रमाण-पत्र का क्रमांक डब्ल्यूआरई-2026-000258 है। प्रमाण-पत्र पर जारी होने की तारीख 30 अगस्त 2026 अंकित है और इसे अतुल्य भारत संस्करण 2026 के अंतर्गत जारी किया गया है। मधुकंठ दास को मिले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से उनके अनुयायियों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। कम उम्र में आध्यात्मिक अध्ययन, वक्तृत्व और कृष्ण भक्ति के प्रति समर्पण को मिली यह मान्यता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत मानी जा रही है, वह मूलरूप से शिवपुरी निवासी है एवं कई वर्षों से बृन्दावन में भगवत भक्ति में लीन है। 

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