म. प्र. लेखक संघ की गोष्ठी संपन्नशिवपुरी। गत दिवस म. प्र. लेखक संघ की मासिक गोष्ठी संघ के अध्यक्ष डॉ महेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ निसार अहमद के मुख्य आतिथ्य, राम कृष्ण मौर्य जी के विशिष्ट आतिथ्य में दुर्गा मठ में संपन्न हुई।संचालन राजकूुमार भारतीय ने किया तो अभार प्रदर्शन अजय जैन अविराम ने।
कार्यक्रम का मंगलाचरण बसन्त श्रीवास्तव द्वारा पढ़ी गई सरस्वती वंदना से हुआ, तदुपरान्त निर्मल हरी ने अपने काव्यपाठ ने कहा- जरा भी हया का नहीं इल्म तुमको, न धीरे से बोले न पर्दा किया है। शायर याकूब साबिर ने अपनी गजल में कहा लाना बहुत जरूरी है दुनिया में इन्किलाब, अपने कलम को खूँ में डुबा कर गजल कहो। गजलकार राधेश्याम सोनी ने प्रेम का संदेश देते हुए कहा बताऊं किस तरह है जी रहा हूं मैं गमे हिज्र में अश्क पी रहा हूं मैं। अगले क्रम में बसंत श्रीवास्तव ने देश भक्ति से ओतप्रोत कविता प्रस्तुत करते हुए कहा आओ हम सब गीत लिखे प्यारे हिंदुस्तान के लहर-लहर लहराए तिरंगा अपनी पूरी शान से। जिसे सभी श्रोताओं ने सराहा। हास्य कवि राजकुमार भारती ने अपने अंदाजे बयां करते हुए सुनाया ऊपनेत्रम को पोंछ कर, तांका झांकी रोज,मुंह पोपला पोंछता,करता किसकी खोज। अजय जैन अविराम ने छात्र आंदोलन के मुखौटे ओढ़े देशद्रोही ताकतों को इंगित करते हुए कहा- मुद्दा था जो रहा नहीं,छुपे सामने आते हैं,मां को गाली देने वाले, छात्र नहीं कहलाते है। जिसे सुन हर व्यक्ति जोश से भर गया और तालियों से समर्थन प्रदान किया।
मंच से रामकृष्ण मौर्य ने सुनाया कटेगा न तन्हा सफर जिंदगी का,बनाओ मुझे है सफर जिंदगी का। डॉ निसार अहमद ने अनुरोध किया- नफरतों की दीवार यार अब तो गिरा दो,कब तलक हम लड़ते रहेंगे यार बता दो। अध्यक्ष पद पर शोभित डॉ महेंद्र अग्रवाल ने पावस को समर्पित गीत बूंद धरती पर गिरी तो प्राण पुलकित हो उठे और उस पर आपसे मिलना गजब ढा जायेगा। के बाद अपनी बात यूं कही आंधियों के पास अपना मन नहीं होता और मन में आंधियां कितनी पता किसको जिसे सुन हर कोई वाह वाह कर उठा। अंत में अजय जैन अविराम ने सदन में उपस्थित कवि शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।।

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