---------------------------------News Website By 𝐑𝐚𝐣𝐮 𝐘𝐚𝐝𝐚𝐯--------------------------------

𝙎𝙝𝙞𝙫𝙥𝙪𝙧𝙞 𝙆𝙝𝙖𝙗𝙖𝙧

Thursday, August 6, 2026

राष्ट्रभक्ति गीतों पर थिरकते कलेक्ट्रेट पहुँचे सहरिया क्रांति के सदस्य, थिरकते हुए पहुंचे कलेक्ट्रेट



कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सुनीं समस्याएँ, कई मामलों का कराया त्वरित निराकरण

शिवपुरी- हाथों में अधिकारों की तख्तियाँ , दिलों में न्याय की उम्मीद और कदमों में राष्ट्रभक्ति का जोश कुछ ऐसा भावनात्मक दृश्य उस समय दिखाई दिया, जब सहरिया आदिवासी सदस्य डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों की धुन पर थिरकते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुँचे। यह केवल एक रैली नहीं थी, बल्कि वर्षों से अभाव, उपेक्षा और अन्याय का सामना कर रहे सहरिया आदिवासी समुदाय की लोकतांत्रिक आवाज थी। उत्साह से भरे महिला-पुरुष अपने अधिकारों के समर्थन में नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। उनके चेहरों पर संघर्ष का दर्द था, लेकिन आंखों में बदलाव की चमक भी साफ दिखाई दे रही थी। सहरिया क्रांति स्थापना दिवस सहरिया आदिवासी प्र्तिबर्ष 5 अगस्त को अधिकार दिवस के रूप मे मानते हैं

सहरिया क्रांति के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम तैयार 60 सूत्रीय ज्ञापन जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा को सौंपा। इस दौरान सहरिया क्रांति संयोजक संजय बेचैन सहित औतार भाई सहरिया, मोहरसिंह आदिवासी, अजय आदिवासी, अनिल आदिवासी, आशाराम आदिवासी,नीलेश आदिवासी ,सुनील आदिवासी ,पंजाब आदिवासी और ऊधम आदिवासी सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के सामने राशन, भूमि, वनाधिकार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी समस्याएँ रखीं। ज्ञापन लेने के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को औपचारिकता निभाकर विदा नहीं किया, बल्कि बड़ी संवेदनशीलता और धैर्य के साथ उनकी बात सुनी। उन्होंने ग्रामीणों से उनकी व्यक्तिगत और सामुदायिक परेशानियों की जानकारी ली तथा कई समस्याओं पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। कुछ प्रकरणों का त्वरित निराकरण होने से आदिवासी प्रतिनिधियों के चेहरों पर संतोष दिखाई दिया।  

 कलेक्टर के आत्मीय और संवेदनशील व्यवहार से भावुक हुए लोगों ने कलेक्ट्रेट परिसर में “जिला प्रशासन जिंदाबाद” और “कलेक्टर साहब जिंदाबाद” के नारे लगाए।

सहरिया क्रांति ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या चुनाव का मंच नहीं, बल्कि शोषण, दमन और अत्याचार के विरुद्ध चल रहा शांतिपूर्ण सामाजिक आंदोलन है। इसका उद्देश्य सहरिया समाज को संविधान तथा शासन की योजनाओं से मिले अधिकारों को जमीन पर लागू कराना है। प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज सरकार से दया नहीं मांग रहा, बल्कि समानता, जीवन, शिक्षा, सम्मान, आजीविका और सामाजिक न्याय के अपने संवैधानिक अधिकार चाहता है।
ज्ञापन में सहरिया परिवारों की रोजमर्रा की पीड़ा को प्रमुखता से उठाया गया। कहीं अंगूठा न लगने या नेटवर्क खराब होने के कारण राशन रोक दिया जाता है, तो कहीं आधार और बैंक खाते की त्रुटि से महिलाओं की पोषण राशि अटक जाती है। अनेक बस्तियों में हैंडपंप खराब हैं, एम्बुलेंस नहीं पहुँचती और बच्चों के जाति प्रमाणपत्र नहीं बनने से छात्रवृत्ति रुक जाती है। मनरेगा मजदूरों को अपने पसीने की मजदूरी के लिए महीनों सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

राशन व्यवस्था से जुड़ी मांगों में कालाबाजारी, कम तौल और फर्जी वितरण के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने की मांग की गई। सहरिया क्रांति ने बायोमेट्रिक विफल होने पर वैकल्पिक सत्यापन से राशन देने, कटे नाम जोड़ने के लिए गांवों में शिविर लगाने और पोषण अनुदान की लंबित राशि तत्काल जारी करने की मांग रखी।

भूमि अधिकारों को समाज के अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न बताते हुए विक्रय से वर्जित आदिवासी भूमि की बिक्री रोकने, पूर्व में दी गई संदिग्ध विक्रय अनुमतियों की समीक्षा करने और दबंगों के कब्जे से जमीन मुक्त कराने की मांग की गई। भूदान भूमि से जुड़ी कथित अनियमितताओं की न्यायिक अथवा एसआईटी जांच, भूमिहीन परिवारों को खेती योग्य जमीन एवं आवासीय पट्टे तथा गांवों में राजस्व अभिलेख सुधार शिविर लगाने की आवश्यकता भी बताई गई।

वनाधिकार के अंतर्गत लंबित और निरस्त दावों की निष्पक्ष पुनः सुनवाई, सामुदायिक वनाधिकारों की मान्यता तथा आदिवासी कब्जे वाली भूमि पर एकतरफा तारबंदी या बाउंड्री रोकने की मांग उठी। प्रतिनिधियों ने वन अमले द्वारा कथित उत्पीड़न और अवैध वसूली की स्वतंत्र जांच व्यवस्था बनाने, महुआ, तेंदूपत्ता, गोंद, शहद जैसी लघु वनोपज का उचित मूल्य दिलाने तथा वन्यजीवों से होने वाली जन, पशु और फसल हानि का शीघ्र मुआवजा देने की मांग की।

ज्ञापन में प्रत्येक सहरिया बस्ती तक स्वच्छ पेयजल, बिजली, सड़क, पुलिया, शौचालय और पक्का आवास पहुँचाने पर जोर दिया गया। अधूरे आवासों की रुकी किस्त जारी करने तथा नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले पात्र सहरिया परिवारों को भी आवास योजनाओं का लाभ देने की मांग की गई। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मोबाइल चिकित्सा इकाई, कुपोषण, एनीमिया, टीबी और सिकल सेल की जांच, सुरक्षित प्रसव, उपस्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर-दवा तथा आयुष्मान कार्ड की बाधाएँ दूर करने का आग्रह किया गया।

सहरिया क्रांति ने अवैध शराब और नशे के कारोबार को समाज के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया। पुलिस, आबकारी, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय की संयुक्त कार्ययोजना बनाकर नशे के कारोबार पर कार्रवाई तथा निःशुल्क नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र खोलने की मांग की गई। शिक्षा से जुड़ी मांगों में जर्जर विद्यालयों की मरम्मत, शिक्षकविहीन स्कूलों में नियुक्ति, छात्रावासों की संख्या बढ़ाने और छात्रवृत्ति, गणवेश, पुस्तक व साइकिल समय पर उपलब्ध कराने की बात कही गई।

रोजगार के लिए मांगते ही मनरेगा का काम, निर्धारित समय पर मजदूरी, जॉब कार्ड मजदूर के पास रखने और फर्जी हाजिरी पर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई गई। बंधुआ मजदूरी से परिवारों को बचाने, पलायन करने वाले श्रमिकों का पंजीयन, युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, स्थानीय रोजगार तथा खेती, पशुपालन और छोटे व्यवसायों के लिए बिना बिचौलिये सहायता देने का आग्रह किया गया।

ज्ञापन में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा पर तत्काल एफआईआर, मानव तस्करी की रोकथाम, वृद्ध-विधवा-दिव्यांग पेंशन का नियमित भुगतान तथा दस्तावेज सुधार की सेवाएँ गांव में उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। थानों और सरकारी कार्यालयों में आदिवासी फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार, प्रत्येक आवेदन की पावती तथा शांतिपूर्ण सभा, रैली और ज्ञापन के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

अंतिम मांग में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी और शिवपुरी में कलेक्टर की अध्यक्षता में सहरिया समस्या निवारण प्रकोष्ठ बनाने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही प्रत्येक मांग पर 30 दिन में प्रारंभिक कार्रवाई, 60 दिन में जिला स्तरीय समीक्षा और 90 दिन में सार्वजनिक प्रगति प्रतिवेदन जारी करने की मांग की गई।

सहरिया प्रतिनिधियों ने कहा, भूखे परिवार को पोर्टल की त्रुटि नहीं समझ आती, बीमार मां को वाहन चाहिए, बच्चे को सुरक्षित कक्षा और शिक्षक चाहिए, मजदूर को समय पर मजदूरी तथा आदिवासी को अपनी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार और सुरक्षा चाहिए।” कलेक्ट्रेट में संवेदनशील सुनवाई से समुदाय को उम्मीद की नई किरण मिली है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 60 सूत्रीय ज्ञापन की मांगें कागज से निकलकर सहरिया बस्तियों की जमीन तक कब पहुँचती हैं।

No comments: