उत्साह से मनाया जाएगा राधाष्टमी महोत्सव, अशोक वाटिका में सीता-हनुमान मिलन भावपूर्ण प्रसंग पर भावविभोर हुए श्रद्धालुशिवपुरी। श्रीराम जानकी तुलसी आश्रम बड़े हनुमान मंदिर परिसर में परम श्रद्धेय श्री श्री 1008 पूज्य गुरुदेव भगवान श्री मौनी जी महाराज की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित राधाष्टमी महोत्सव एवं मां जानकी कथा में भक्ति की सरिता बह रही है। इसी क्रम में आज उत्साह के साथ राधाष्टमी महोत्सव मनाया जाएगा और प्रात: 9 बजे से महोत्सव के साथ ही विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया है। महामंडलेश्वर श्री पुरुषोत्तम दास जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित कथा में पातालपुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु श्री बालक देवाचार्य जी महाराज व्यासपीठ से मां जानकी के चरित्र एवं भगवान श्रीराम की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर रहे हैं।
कथा में मंचासीन पूज्य श्री श्री 1008 श्री राजेंद्र दास जी महाराज खाटू श्याम से, आयोध्या से भरत दास जी महाराज, शंकरगिरि जी एवं हनुमान दास जी महाराज आदि संत जन का सानिध्य एवं आशीर्वाद धर्मप्रेमजनों को प्राप्त हुआ। कथा के मुख्य यजमान श्रीमती अंजलि-देवेंद्र शर्मा (लल्लू भैया) परिवार हैं। संत कुमार शर्मा (संता), मुकेश शर्मा, अनिल शर्मा (अन्नी), देवांश शर्मा सहित परिवार के सदस्य सपरिवार कथा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। विशाल भण्डारे में सभी धर्मप्रेमीजनों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पुण्य लाभ लेने का आग्रह श्रीतुलसी आश्रम सेवा समिति शिवपुरी के द्वारा किया गया है।
कथा में माता सीता ने मुद्रिका से पहचान लिया भगवान राम रामदूत को
कथा के दौरान अशोक वाटिका में माता सीता और हनुमान जी के मिलन का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास ने बताया कि माता जानकी की खोज करते हुए हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचे और भगवान श्रीराम की दी हुई मुद्रिका उनके समक्ष प्रस्तुत की। मुद्रिका पर अंकित श्रीराम नाम को देखकर माता जानकी को विश्वास हो गया कि हनुमान जी प्रभु श्रीराम के दूत हैं। जगतगुरु श्री बालक देवाचार्य जी महाराज ने श्रीराम नाम की महिमा बताते हुए कहा कि हनुमान जी के लिए भगवान का नाम ही उनकी पहचान, शक्ति और आधार है। माता जानकी द्वारा भगवान श्रीराम के करुणामय स्वरूप और उनके नामों के भाव की सुंदर व्याख्या भी कथा में की गई।
हनुमान जी ने आज्ञा लेकर खाए फल, मिला बड़ा संदेश
कथा में बताया गया कि अशोक वाटिका में हनुमान जी को जब भूख लगी तो उन्होंने माता जानकी से आज्ञा लेकर फल ग्रहण किए। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा गया कि हमें कोई भी कार्य करने से पहले भगवान को अपने हृदय में धारण करना चाहिए। प्रभु का स्मरण मनुष्य को सही दिशा और शक्ति प्रदान करता है।
एक वानर ने मचा दिया पूरी लंका में हाहाकार
माता जानकी से भेंट के बाद हनुमान जी के पराक्रम का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि अशोक वाटिका में हनुमान जी ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि पूरी लंका में हाहाकार मच गया। रावण ने उन्हें रोकने के लिए मेघनाद को भेजा। मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया और हनुमान जी को रस्सियों से बांधकर रावण के दरबार में ले जाया गया।
कथा में जय जय श्रीराम के हुए उद्घोष
कथा के इन प्रसंगों का श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर श्रवण किया। कथा पंडाल में बार-बार 'जय श्रीरामÓ और 'जय बजरंगबलीÓ के जयघोष गूंजते रहे। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति लगातार बनी हुई है और पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आ रहा है।
कथा में माता सीता ने मुद्रिका से पहचान लिया भगवान राम रामदूत को
कथा के दौरान अशोक वाटिका में माता सीता और हनुमान जी के मिलन का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास ने बताया कि माता जानकी की खोज करते हुए हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचे और भगवान श्रीराम की दी हुई मुद्रिका उनके समक्ष प्रस्तुत की। मुद्रिका पर अंकित श्रीराम नाम को देखकर माता जानकी को विश्वास हो गया कि हनुमान जी प्रभु श्रीराम के दूत हैं। जगतगुरु श्री बालक देवाचार्य जी महाराज ने श्रीराम नाम की महिमा बताते हुए कहा कि हनुमान जी के लिए भगवान का नाम ही उनकी पहचान, शक्ति और आधार है। माता जानकी द्वारा भगवान श्रीराम के करुणामय स्वरूप और उनके नामों के भाव की सुंदर व्याख्या भी कथा में की गई।
हनुमान जी ने आज्ञा लेकर खाए फल, मिला बड़ा संदेश
कथा में बताया गया कि अशोक वाटिका में हनुमान जी को जब भूख लगी तो उन्होंने माता जानकी से आज्ञा लेकर फल ग्रहण किए। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा गया कि हमें कोई भी कार्य करने से पहले भगवान को अपने हृदय में धारण करना चाहिए। प्रभु का स्मरण मनुष्य को सही दिशा और शक्ति प्रदान करता है।
एक वानर ने मचा दिया पूरी लंका में हाहाकार
माता जानकी से भेंट के बाद हनुमान जी के पराक्रम का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि अशोक वाटिका में हनुमान जी ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि पूरी लंका में हाहाकार मच गया। रावण ने उन्हें रोकने के लिए मेघनाद को भेजा। मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया और हनुमान जी को रस्सियों से बांधकर रावण के दरबार में ले जाया गया।
कथा में जय जय श्रीराम के हुए उद्घोष
कथा के इन प्रसंगों का श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर श्रवण किया। कथा पंडाल में बार-बार 'जय श्रीरामÓ और 'जय बजरंगबलीÓ के जयघोष गूंजते रहे। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति लगातार बनी हुई है और पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आ रहा है।

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