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Wednesday, December 31, 2025

जीवन में सच्चा मित्र वही जो मित्र के दु:ख को अपना दु:ख समझें और सहयोग करें : आचार्य सतानंद प्रपन्न रामानुजाचार्य




जल मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग श्रवण कराया

शिवपुरी- आज के इस भौतिकवादी युग में मित्रता की पहचान करना आसान नहीं लेकिन असल में सच्चा मित्र वही होता है जो अपने मित्र के दु:ख को अपना दु:ख समझे और उसके सुख में अपना सुख समझते हुए हर समय किसी भी परिस्थिति में मदद व सहयोग करें,ख् भगवान श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता इसका प्रमाण है कि जीवन में सच्चा मित्र कैसा होना चाहिए, क्योंकि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो, सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना उसके कहे ही मदद कर दें। जीवन में सच्चे और अच्छे मित्र के इस प्रसंग पर श्रीमद्भागवत में आर्शीवचन दिए प्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य सतानंद प्रपन्न रामानुजाचार्य ने जो स्थानीय जल मंदिर में गोयल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत के विश्राम दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा कथा का वृतान्त उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रवण करा रहे थे। इस अवसर पर कथा के प्रारंभ से पूर्व कथा के यजमान परिवार सत्यनारायण गोयल, संजीव-श्रीमती ललिता गोयल (संजीव स्टेशनरी) द्वारा पूजा-अर्चना की गई। इसके पश्चात व्यास आचार्य सतानंद प्रपन्न रामानुजाचार्य द्वारा कथा के विभिन्न प्रसंगो पर प्रवचन दिये गए। यहां कथा व्यास सतानंद प्रपन्न रामानुजाचार्य ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो, सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना उसके कहे ही मदद कर दे, कथा के अंत में  पारिक्षित जी को मोक्ष व भगवान शुकदेव जी की विदाई का सुंदर वर्णन किया गया। कथा के मध्य में भजनों का आनंद लिया गया और इस दौरान बड़ी संख्या में महिला पुरुष श्रोता मौजूद थे, कथा के अंत में आरती की गईं और कथा आयोजक सत्यनारायण जी,संजीव जी, ललिता गोयल (संजीव स्टेशनरी) द्वारा सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया।

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