बाल तस्करी रोकने स्टेशन परिसर एवं ट्रेनों के भीतर होगी निगरानीशिवपुरी-रेलवे स्टेशन परिसर में आने वाले बच्चों एवं ट्रेनों में यात्रा कर रहे बालकों पर कड़ी नजर रखी जाए, यदि कोई बच्चा डरा, सहमा या संदेहास्पद दिखे तो उससे पूछताछ करें, जिससे बाल तस्करी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। यह सुझाव रेल बाल सुरक्षा समिति की बैठक में बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने दिया।
उन्होंने कहा कि बच्चों की तस्करी एवं प्रेम प्रसंग में घर से भागने में किशोर-किशोरियां अधिकतर रेलगाड़ी का उपयोग करते है। इस पर अंकुश लगाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। दरअसल रेलवे स्टेशन एवं रेल यात्रा को बाल अनुकूल बनाने तथा बाल अपराधों के नियंत्रण के लिए रेल मंत्रालय के निर्देश पर स्टेशन पर बाल सुरक्षा समिति गठित है। बाल कल्याण समिति सदस्य धीरेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि समिति के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग बच्चों को काम के बहाने बहलाकर ले जाते है। बड़ी सैलरी का सपना दिखाकर उन्हें विदेशों तक ले जाया जाता है, बाद में वे मुश्किल परिस्थितियों में फंस जाते हैं, इसे रोकने के लिए निगरानी जरूरी है।
बैठक में जीआरपी एसआई मंशाराम सामरे ने बताया रेलवे अपने सभी यात्रियों को सुखद और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष संवेदनशील रहता है। बैठक में आरपीएफ प्रआ विवेक कौशल, आरक्षक कर्मवीर सिंह, रामप्रकाश एवं जीआरपी आरक्षक रामनाथ किरार, स्टेशन के कर्मचारी एवं रेलवे स्टेशन के दुकानदार मौजूद रहे।
कोच में अकेली महिला होने पर पुरुषों का प्रवेश प्रतिबंधित
आरपीएफ एएसआई गुलाब सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे का नियम है कि यदि किसी कोच में अकेली महिला यात्री होती है, तो मेरी सहेली पहल के तहत यात्रा के पहले स्टेशन से अंतिम स्टेशन तक उस कोच में हमारी महिला कर्मचारी उन्हें अटेंड कर सुरक्षा प्रदान करती है। मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों में स्लीपर और 3्रष्ट कोचों में महिलाओं के लिए 6 बर्थ आरक्षित होती हैं। महिला कोच में पुरुषों का प्रवेश धारा 162 के तहत प्रतिबंधित है, ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

No comments:
Post a Comment