शिवपुरी-यूजीसी के नए नियमों को देश हित में निरस्त किए जाने बाबत राष्ट्रपति के नाम अखंड ब्राह्मण सेवा समिति ने एडीएम दिनेश चन्द्र शुक्ला को ज्ञापन सौंपा।जैसा कि ज्ञात है 13 जनवरी को यूसीजी द्वारा जो गजट प्रस्तुत कर, नए नियमों की घोषणा की गई है, वह भारतीय संविधान के बिल्कुल विपरीत है। और इसके प्रभाव से आपसी वैमनस्यता को अत्यधिक बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सामाजिक समरसता के साथ जबरदस्त अन्याय होगा। पिछले दिनों यूजीसी में ब्राह्मणों सहित सवर्णो को देश छोडऩे के नारे लिखे गए। वैसे भी हिंदुस्तान में प्रतिभा से अधिक अन्य मानको का बोल बाला है। हर जगह जाति को आधार माना जा रहा है। आरक्षित वर्ग का कितना भी बड़ा अधिकारी, मंत्री,आर्थिक रुप से सबल, व्यापारी, कारोबारी क्यों न हो, उसे दबा कुचला ही माना जाता है।
एससी, एसटी एक्ट का कितना दुरुपयोग हो रहा है। यह सबके सामने आ चुका है। लगभग 90 प्रतिशत एससी, एसटी एक्ट फर्जी पाए गए। जिनका प्रयोग सिर्फ दूसरे व्यक्ति को तंग करने के लिए किया गया था।। आज के समय में कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति का जातिगत दुर्भावना के आधार पर अपमान नहीं करता है। फिर ऐसे में यूजीसी के नियमों के चलते सवर्णों के प्रति कितना न्याय हो पाएगा। इसलिए विनम्र आग्रह है कि तत्काल प्रभाव से त्रष्ट के इन नियमो को देश हित में प्रतिबंधित करने की कृपा करें। यही विनय है।
इस अवसर पर प्रदेश संरक्षक पंडित मोहन किशोर व्यास, प्रदेश उपाध्यक्ष कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा, संभागीय सचिव पं.बालमुकुंद ुरोहित, सलाहकार कैलाश नारायण मुद्गल, अमर सिंह रावत, बच्चन लाल गुप्ता, योग शिक्षक हरि बल्लभ शर्मा, आचार्य पंकज शर्मा, महासचिव पं.दिनेश चन्द्र शर्मा, सचिव पं.संजय शर्मा, सचिव एड. संतोष शुक्ला, एड.वरुण शर्मा, सचिव रामसेवक गौड़, युवा उपाध्यक्ष राजा दीक्षित, संगठन मंत्री सुनील शुक्ला, पं.अरुण दीक्षित,पं.दीपक शर्मा, समर्थ शर्मा उपस्थित थे।

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