अंचल का नाम किया रोशन, इस प्रतिष्ठित परीक्षा को उत्तीर्ण करने वाले बने पहले अधिवक्ताशिवपुरी- छोटे से शहर शिवपुरी से निकलकर सुप्रीमकोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड(एओआर) की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवा अधिवक्ता एस.के.चौकसे पुत्र नितिन चौकसे निवासी कमलागंज एबी रोड़ शिवपुरी, ऐसे अधिवक्ता बन गए है जो इस प्रतिष्ठित परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले पहले अधिवक्ता है।
इस उपलब्धि से एस.के.चौकसे ने ना केवल अंचल शिवपुरी का नाम रोशन किया बल्कि शिवपुरी के नाम को देश की राजधानी दिल्ली के सर्वोच्चा न्यायालय तक पहुंचाने का अनुकरणीय कार्य किया है। अंचल शिवपुरी के नगरवासी, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी सहित सभी नगरवासीयों ने हर्ष जताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है और उज्जवल भविष्य की कामना की। यहां बता दें कि इस परीक्षा में पूरे देश भर के 1600 में से 207 ने ही इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया है ऐसे में शिवपुरी के लिए यह गौरव की बात है कि एस.के.चौकसे ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शामिल होकर उत्तीर्ण की।
बताना होगा कि मध्यप्रदेश के शिवपुरी के लिए यह एक उल्लेखनीय क्षण है, जहां अधिवक्ता यशस्वी एस.के. चौकसे ने जून 2025 में आयोजित सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) परीक्षा उत्तीर्ण की है। वह शिवपुरी से इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास करने वाले पहले अधिवक्ता हैं। यशस्वी चौकसे ने विधि की शिक्षा कैम्पस लॉ सेंटर, फैकल्टी ऑफ लॉ, यूनीवर्सिटी ऑफ दिल्ली से प्राप्त की। विधि अध्ययन के दौरान ही उन्होंने संवैधानिक और अपीलीय विधि में गंभीर रुचि विकसित की, जिसने आगे चलकर उनके पेशेवर पथ को दिशा दी। एओआर परीक्षा सुप्रीम कोर्ट में प्रक्रियात्मक जिम्मेदारियों से जुड़ी एक विशेष योग्यता है, जिसके माध्यम से अधिवक्ता को न्यायालय में वाद दायर करने और रिकॉर्ड पर अधिकृत रूप से कार्य करने का अधिकार प्राप्त होता है।
सीमित संख्या में अधिवक्ता ही प्रत्येक वर्ष इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर पाते हैं। केवल एओआर ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका, अपील या विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर सकता है, बिना एओआर के हस्ताक्षर के कोई भी मामला सूचीबद्ध नहीं किया जाता। शिवपुरी जैसे शहर से राष्ट्रीय स्तर की न्यायिक प्रक्रिया में यह प्रतिनिधित्व निस्संदेह स्थानीय विधि समुदाय के लिए प्रेरक है। यशस्वी चॉकसे की यह उपलब्धि संयमित परिश्रम और निरंतर साधना का परिणाम है जो यह दर्शाती है कि समर्पण के साथ छोटे शहरों से भी सर्वोच्च मंच तक पहुँचा जा सकता है।

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