शिवपुरी-सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। इस मामले में शिवपुरी के अधिवक्ता राशिल गांधी ने प्रतिवादी की ओर से पैरवी की।प्रकरण में याचिकाकर्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में आरोपी की सजा को पूर्व में भुगती गई अवधि (श्चद्गह्म्द्बशस्र ड्डद्यह्म्द्गड्डस्र4 ह्वठ्ठस्रद्गह्म्द्दशठ्ठद्ग) तक सीमित करते हुए जुर्माने की राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी थी तथा उक्त राशि शिकायतकर्ता को धारा 357 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क दिया गया कि आरोपी द्वारा किए गए अपराध की प्रकृति गंभीर है और उसे दी गई सजा को कम करना उचित नहीं था। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी एक आदतन अपराधी है और उसके विरुद्ध अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह पाया कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है, इसलिए विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने लंबित सभी आवेदनों को भी निरस्त मानते हुए प्रकरण का निस्तारण कर दिया।

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