न्यायालय ने कहा शिकार या अपराध से जोडऩे वाले विश्वसनीय तथ्य नहींशिवपुरी। वन परिक्षेत्र शिवपुरी के बिरधा बीट क्षेत्र में मृत मिले तेंदुए के मामले में आरोपी बनाए गए जयप्रकाश गुर्जर को सत्र न्यायालय शिवपुरी से अग्रिम जमानत मिल गई है। अग्रिम जमानत याचिका क्रमांक 363/2026 पर सुनवाई करते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री संजय श्रीवास्तव ने जयप्रकाश गुर्जर को राहत प्रदान की।
प्रकरण में वन विभाग द्वारा पी.ओ.आर. क्रमांक 1014/2022 दिनांक 19 मई 2026 के अंतर्गत वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 39 एवं 50 के तहत कार्रवाई की जा रही थी। वन विभाग का आरोप था कि बिरधा बीट क्षेत्र में तेंदुए का शव मिला था, जिसे कथित रूप से तार से बांधकर घसीटा गया तथा साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से आसपास की झाडयि़ों में आग लगाई गई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अंकुर चतुर्वेदी ने न्यायालय के समक्ष प्रभावी तर्क रखे। उनके साथ अधिवक्ता कुमारी दीक्षा रघुवंशी, एरिस खान एवं चंद्रभान सिंह कोटिया भी उपस्थित रहे। बचाव पक्ष ने कहा कि जयप्रकाश गुर्जर को बिना ठोस आधार के मामले में फंसाया जा रहा है। तेंदुए की मृत्यु शिकार से नहीं, बल्कि प्राकृतिक कारणों, कमजोरी, अधिक गर्मी, भूख-प्यास और पूर्व से लगी चोटों के कारण होना प्रतीत होती है।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और आरोपी से पूछताछ आवश्यक है। हालांकि न्यायालय ने प्रकरण डायरी, पंचनामा और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि इस स्तर पर ऐसे विश्वसनीय तथ्य उपलब्ध नहीं हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो कि जयप्रकाश गुर्जर ने ही तेंदुए का शिकार किया या उससे संबंधित कोई अपराध किया। न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी से वन्य जीव से संबंधित कोई सामग्री जब्त नहीं हुई है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं बताया गया है। इसी आधार पर न्यायालय ने आदेश दिया कि यदि जयप्रकाश गुर्जर को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे 50 हजार रुपये की जमानत राशि एवं समान राशि के बंधपत्र पर रिहा किया जाए। साथ ही उसे जांच में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित न करने और न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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