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Thursday, June 4, 2026

मित्रता में अमीरी-गरीबा का महत्व नहीं होगा, श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता से लें सीख : पं.मनोहर जी महाराज






कथा यजमान एड.दीपक अग्रवाल ने भगवान श्रीकृष्ण एवं परिजन संतोष अग्रवाल ने सुदामा स्वरूप किया धारण

शिवपुरी- सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का कोई महत्व नहीं होता, यदि यह देखना है तो इसके लिए श्री कृष्ण और सुदामा कथा को ना केवल श्रवण करें बल्कि आत्मसात भी करें, कथा अनुसार महर्षि सांदीपनि के आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा एक साथ पढ़ते थे, एक बार जंगल में जब दोनों लकड़ी लेने गए, तो गुरुमाता ने उन्हें थोड़े से चने खाने के लिए दिए, जिस पर सुदामा ने कृष्ण को बिना बताए सारे चने अकेले खा लिए।, 

इसका परिणाम यह हुआ कि मान्यता अनुसार इसी कारण सुदामा को बाद में घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ा, जबकि द्वारका में मिलन सालों बाद, अत्यंत गरीबी के दिनों में अपनी पत्नी के आग्रह पर सुदामा द्वारकाधीश कृष्ण से मदद मांगने गए, तब वह फटेहाल सुदामा को देखकर द्वारपालों ने उन्हें अंदर जाने से रोका, लेकिन जैसे ही भगवान कृष्ण को अपने बालसखा के आने का पता चला तो वह नंगे पैर दौड़ पड़े और भगवान कृष्ण ने सुदामा को गले लगाया और साथ लेकर अपने सिंहासन पर बैठाकर उनके पैरों को अपने आंसुओं से धोया, तभी उन्होंने देखा कि सुदामा संकोच के कारण अपनी पत्नी द्वारा दिए गए चावल (तंदुल) की पोटली छुपा रहे थे, लेकिन कृष्ण ने उसे छीन कर खा लिया,

यहां सुदामा अपने मित्र कृष्ण से कुछ भी नहीं मांग सके, लेकिन जब सुदामा अपने गांव लौटे, तो उनकी टूटी-फूटी झोपड़ी की जगह एक विशाल महल खड़ा था और उनकी पत्नी सुंदर वस्त्रों में बाहर आई। बिना कुछ कहे ही, कृष्ण ने अपने मित्र की सारी दरिद्रता दूर कर दी और उन्हें तीनों लोकों का सुख प्रदान किया। यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की यही मित्रता सच्चे मित्र की पहचान कराती है। 

मित्रता की इस अनुकरणीय कथा को श्रवण कराया व्यासपीठ से परम पूज्य पं. मनोहर जी महाराज ने स्थानीय अग्रवाल पैलेस कोतवाली रोड़ पर कथा यजमान अशोक कुमार-श्रीमती व्ही.एम.अग्रवाल (एडवोकेट), दीपक अग्रवाल एडवोकेट एवं नीरज अग्रवाल (न्यायाधीश)परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के श्रीकृष्ण-सुदामा कथा का वृतान्त व्यासपीठ से श्रवण करा रहे थे। इस अवसर पर कथा यजमान एड.दीपक अग्रवाल के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण का प्रतीक तो उनके चाचा संतोष अग्रवाल के द्वारा सुदामा का स्वरूप धारण कथा प्रसंगों में अभिनय की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा का धर्मलाभ लेते हुए पुण्य लाभ अर्जित किया।

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