शिवपुरी-नगर पालिका में बीते एक वर्ष पूर्व से विरोध कर रहे बगीचा सरकार पर कसम खाने वाले करीब 18 पार्षदों में से 12 से अधिक भाजपा के पार्षद व निर्दलीय सहित कांग्रेसी पार्षदों ने नपाध्यक्ष को लेकर विरोध दर्ज कराते हुए शहर के माधवचौक चौराहे पर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया और नपाध्यक्ष मुर्दाबाद के नारे लगाए। वहीं बताया गया है कि इस घटना से आहत होकर नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा के द्वारा आनन फानन में नोटिस थमाकर सभी पार्षद को तीन दिन में अपने खिलाफ लगाए गए मुर्दाबाद के नारे के संबंध में जबाब मांगा है अन्यथा की स्थिति में सभी विरोध दर्ज कराने वाले पार्षदों को अध्यक्ष परिष से बर्खास्त कर देंगी।बताना होगा कि नगर पालिका क्षेत्र के 12 से अधिक भाजपा के पार्षद, निर्दलीय सहित कांग्रेसी पार्षदों के द्वारा लगाता नगर में हो रही अपनी उपेक्षा के चलते विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव एवं केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के आगमन से एक दिन पूर्व ही सभी पार्षदों ने अपना विरोध जाहिर करते हुए नगर के पुलिस सहायता केन्द्र पर एकत्रित होकर रणनी बनाई और हाथों में तख्तियां लेकर नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा का विरोध दर्ज कराया गया। यहां बीच चौराहे पर इन पार्षदों के द्वारा नपाध्यक्ष मुर्दाबाद के नारे जोर-शोर के साथ लगाए गए और नगर पालिका में हुए भ्रष्टाचार सहित अन्य समस्याओं को लेकर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया गया जिसमें शहर के माधवचौक की परिक्रमा करते हुए कोर्ट रोड़, प्रगति बाजार, निचला बाजार सहित शहर के प्रमुख बाजार में यह रैली निकालते हुए नपाध्यक्ष का विरोध दर्ज किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में पार्षद ओमप्रकाश जैन ओमी, विजय शर्मा, गौरव सिंघल, सीटू सडैया, रत्नेश जैन डिम्पल, अनिल बघेल, कुलदीप शर्मा, पंकज शर्मा, श्री नागर, कमल किशन शाक्य, संजय गुप्ता पप्पू, बाईसराम धाकड़ सहित अन्य पार्षद शामिल रहे।
भाजपा जिलाध्यक्ष पहुंचने मनाने, उनकी भी नहीं माने
जब पार्षदों के द्वारा नपाध्यक्ष के प्रति होने वाले विरोध की जानकारी भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव को लगी तो वह स्वयं मौके पर पहुंचे और उन्होंने सभी पार्षदों से उनकी नाराजगी का कारण जाना। हालांकि पार्षदों ने अपनी नाराजगी को कड़े शब्दों में प्रकट करते हुए किसी भी तरह की बात मानने से इंकार कर दिया और पार्षदों ने लगातार नपाध्यक्ष विरोधी नारे लगाए। भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव की भी जब पार्षदों ने नहीं सुनी तो वह बेमन से वहां से निकल गए।

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