ठहरकर खुद से पूछा-आनंद कब बढ़ता है और कब घटता है?शिवपुरी/नरवर। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में आयोजित 30 दिन 30 कार्यशालाएं अभियान के तहत 17वीं कार्यशाला शासकीय महाविद्यालय नरवर में आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ मां वीणावादिनी के समक्ष जनभागीदारी समिति अध्यक्ष धीरज गुप्ता एवं महाविद्यालय प्राचार्य नवल किशोर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने प्रतिभागियों को अपने जीवन के आनंद को पहचानने तथा आनंद बढऩे और घटने के कारणों पर 'अल्पविरामÓ लेकर चिंतन कराया। उन्होंने कहा कि जीवन की व्यस्तता के बीच कुछ क्षण ठहरकर स्वयं को देखने से आनंद के वास्तविक स्रोतों को समझा जा सकता है।
इसके बाद आनंदम सहयोगी ब्रजेश सिंह तोमर ने घटना और प्रतिक्रिया विषय पर सत्र लिया। उन्होंने बताया कि घटना पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन घटना के प्रति हमारी प्रतिक्रिया पर हमारा नियंत्रण होता है। प्रतिक्रिया देने से पहले लिया गया अल्पविराम परिस्थितियों को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आनंदम सहयोगी अवध प्रताप सिंह चौहान ने जीवन का लेखा-जोखा सत्र में चार प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों को मदद करने-लेने, माफी मांगने और क्षमा करने जैसे जीवन के अनुभवों पर चिंतन कराया। उन्होंने नि:स्वार्थ सहयोग और क्षमा को आनंद से जोड़ते हुए प्रतिभागियों को स्वयं के भीतर झांकने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में आनंद विभाग का परिचय प्रियांशु भार्गव ने दिया। एम. टोंगपांग ने आइस-ब्रेकर गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को अल्पविराम की अवधारणा समझाई। प्रीति तिवारी ने प्रतिभागियों से फीडबैक लिया। समापन सत्र राजेश पटेल ने किया। स्वागत सत्र डॉ. रूपेश श्रीवास्तव ने किया, जबकि आभार कार्यक्रम प्रभारी प्रोफेसर कनिका गुप्ता ने व्यक्त किया।


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