लोकसभा चुनाव :
16 से शुरू होने है नामांकन, सिंधिया के विरूद्ध विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी की स्थिति हुई मजबूत
शिवपुरी- बात लोकसभा चुनाव की हो रही है और भाजपा पार्टी को मप्र की 29 लोकसभा सीटनें जीतने के लिए हरेक लोकसभा में ऐसा प्रत्याशी चाहिए जो जिताऊ चेहरा और जनता के बीच का हो, लेकिन दोनों ही मामलों में भाजपा-कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी को लेकर कश्मकश में है। यहां यदि भाजपा की बात करें तो वर्तमान विधायक कोलारस वीरेन्द्र रघुवंशी को हालातों के मद्देनजर लोकसभा टिकिट दिया जा सकता लेकिन पार्टी अपनी गाईड लाईन के विपरीत जाए इसकी संभावना भी कम है दूसरी ओर भाजपा से किसी अन्य चेहरे
की तलाश भी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही, ऐसे में गुना-शिवपुरी से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समक्ष वर्तमान कोलारस विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ही ऐसा चेहरा है जो सिंधिया के समक्ष मजबूत और जनता में जनहितैषी चेहरा साबित हो सकता है। यदि भाजपा को अपना एक विधायक सांसदी के लिए कुर्बान भी कर दिया जाए तो संभवत: उलटफेर होने वाले परिणाम भाजपा के लिए आश्चर्यजनक साबित होंगें, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। चूंकि 16 अप्रैल से नामांकन शुरू होने है और ऐसे में लोकसभा क्षेत्र बढ़ा होने के कारण भाजपा प्रत्याशी की घोषणा भी शीघ्र होना चाहिए अन्यथा कांग्रेस के वर्तमान सांसद सिंधिया को तो कांग्रेस टिकिट दे या ना दे बाबजूद इसके वह अपने क्षेत्र मे जाना-पहचाने चेहरे के रूप में अपनी ख्याति बनाए हुए है।
क्यों दावेदार है कोलारस विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी
लोकसभा चुनावों में आखिरकार गुना-शिवपुरी से भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन में मुश्किलों का सामना क्यों करना पड़ रहा है उसे इस तरह समझा जाए तो बेहतर होगा कि कोलारस विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी वर्ष 2006-07 से अंचल ही नहीं बल्कि भाजपा में आने के बाद वह मप्र के विधानसभा चुनाव प्रभारी के रूप में अशोकनगर, चंदेरी, मुंगावली तक में कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय जनता के बीच जुड़ चुके है इसके उलट एक अन्य पहलू यह भी है कि शिवपुरी व कोलारस विधानसभा और गुना सहित बमौरी, चंदेरी यह वे विधानसभाऐं है जहां वीरेन्द्र रघुवंशी सांसद सिंधिया की भांति ही क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम है और वह सतत कार्य करते हुए अपनी पहचान बनाए हुए है। ऐसे में वर्तमान विधायक कोलारस वीरेन्द्र रघुवंशी की दावेदारी भले ही वह ना करें लेकिन पार्टी को गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से यदि कोई दावेदार दमदार प्रत्याशी चाहिए तो वह वीरेन्द्र रघुवंशी से बेहतर कोई नहीं हो सकता।
बाहरी प्रत्याशियों को मिलेगी करारी
लोकसभा चुनावों में एक ओर जहां कांग्रेस पार्टी से संभावित प्रत्याशियों में वर्तमान सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी पत्नि प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया का नाम मजबूती के साथ चल रहा है तो वहीं भाजपा के लिए स्थानीय प्रत्याशी कहीं अधिक आवश्यक है। यदि कहीं बाहरी प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा से उसे कई गुना करारी हार मुंह की खानी पड़ेगी। जिसमें पूर्व के लोकसभा चुनावों में भाजपा के कद्दावर नेता और मंत्री रहे डॉ.नरोत्तम मिश्रा और कट्टर हिन्दूवादी नेता की पहचान बने जयभान सिंह पवैया के रूप में जनता हार का स्वाद चखा चुकी है। इसके बाद भी यदि भाजपा ने लोकसभा में किसी बाहरी प्रत्याशी को थोपा तो इसका मतलब यह होगा कि कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को लाखों-लाखों मतों से विजयी कर देना। ऐसे में मुनासिब प्रत्याशी के लिए स्थानीय दावेदारों में वीरेन्द्र रघुवंशी ही एक ऐसा चेहर है जो ना केवल सांसद सिंधिया के समक्ष बल्कि सिंधिया की पत्नि प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया भी दावेदार होती है तो उनसे कड़ा मुकाबला कर परिणाम उलटफेर करने वाले दे सकते है।


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