बदरवास रेलवे स्टेशन पर मानवता की मिसाल बनी शीतल जलसेवाशिवपुरी/बदरवास - आसमान से बरसती आग, तपती पटरियां, गर्म हवाओं के थपेड़े और प्यास से व्याकुल यात्रीज् ऐसे कठिन मौसम में बदरवास रेलवे स्टेशन पर कुछ लोग मानवता की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। सामाजिक संस्था रेलवे सुविधा संघर्ष समिति द्वारा स्टेशन पर निरंतर शीतल जलसेवा संचालित की जा रही है। यह सेवा यात्रियों के लिए केवल पानी नहीं, बल्कि भीषण गर्मी में राहत और अपनत्व का अहसास बन गई है।
सुबह से देर रात तक स्टेशन पर ट्रेनों के रुकते ही समिति के जलसेवक हाथों में ठंडे पानी के कैंपर लेकर यात्रियों तक पहुंच जाते हैं। कोई खिड़की से पानी मांगता नजर आता है तो कोई प्लेटफॉर्म पर उतरकर राहत की सांस लेते हुए शीतल जल ग्रहण करता है। यात्रियों के सूखे कंठ को जैसे ही ठंडा पानी मिलता है, उनके चेहरे खिल उठते हैं। कई यात्री जलसेवकों को दिल से दुआएं और धन्यवाद देते दिखाई देते हैं। ये जल सेवक यात्रियों के आगे के स?र में प्यास बुझाने हेतु उनकी बोतलों को भी भरने का काम करते हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, वहीं सामाजिक संस्था रेलवे सुविधा संघर्ष समिति के जलसेवक दोपहर की चिलचिलाती धूप में लगातार सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। संस्था द्वारा आरओ कैंपर के माध्यम से शुद्ध एवं ठंडा पानी यात्रियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। जलसेवा में लगे जलसेवकों का कहना है कि प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म है और यही भावना उन्हें हर वर्ष इस सेवा के लिए प्रेरित करती है। बदरवास रेलवे स्टेशन पर चल रही यह जलसेवा के अब केवल सेवा नहीं, बल्कि बदरवास की दूर दूर तक पहचान बनती जा रही है। ट्रेनों में यात्रा कर रहे यात्रियों का कहना है कि जब समाज में संवेदनाएं कम होती दिखाई देती हैं, तब इस प्रकार की निस्वार्थ सेवा लोगों के भीतर मानवता का विश्वास फिर से जगाती है। यात्रियों के लिए लंबी यात्रा और भीषण गर्मी के बीच बदरवास स्टेशन पर मिल रहा आरओ कैंपर का यह शुद्ध शीतल जल किसी वरदान से कम नहीं है। प्यासे यात्री समिति के जलसेवकों के सेवाभाव की प्रशंसा करते हुए कहते जाते हैं कि आज के समय में बिना किसी स्वार्थ के इस तरह सेवा करना वास्तव में प्रेरणादायी है। बदरवास रेलवे स्टेशन पर जारी यह जलसेवा केवल प्यास बुझाने का कार्य नहीं कर रही, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही है कि मानवता आज भी जीवित है और सेवा का भाव ही सबसे बड़ी पहचान है।


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