शिवपुरी-मध्यप्रदेश लेखक संघ एवं स्वर्गीय श्री राम किशन सिंघल फाउंडेशन द्वारा पावस तुम्हें प्रणाम कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय दुर्गा मैथ में किया गया। यह कार्यक्रम पावस ऋतु की महिमा, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एवं पिता दिवस को समर्पित रहा। इन विषयों पर लेखक संपादक डॉक्टर महेंद्र अग्रवाल, साहित्यकार गोविंद अनुज एवं अखलाक खान ने वक्तव्य दिये।कवि बसंत श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का आगाज किया। रामकृष्ण मौर्य ने पति-पत्नी के रिश्तों पर हास्य व्यंग रचना प्रस्तुत की, नितेश कोठारी ने रूमानी गजल पेश की वहीं निर्मल हरि ने पिता पर गजल पेश करते हुए कहा, वालिद नहीं है जहां मैं तो हर कोई यतीम है। भगवान सिंह ने शारीरिक व मानसिक दशा पर गजल सुनाई। श्रीमती मृदुला नामदेव ने वर्षा ऋतु पर प्रभावी गीत सुनाया माटी की सोंधी सुगंध ने स्वागत किया तुम्हारा है, शीतल मंद पवन ने अंक में भर के तुम्हें पुकारा है, प्यासी धरती करती है तप करके तेरा आह्वान आओ पावस तुम्हें प्रणाम पावस पावस तुम्हें प्रणाम। राकेश भटनागर भ्रमर के सद्भाव पर पढ़ा गीत धरती बाँटी सागर बांटा मत बाँटो इंसान को खूब पसंद किया गया। आपने दोहे भी सुनाए धरा प्रेरणा दे रही रहना धीर सामान।प्रेम भाव मृदु रीति से रखना सबका ध्यान।
शिक्षा विभाग में शैक्षणिक कार्य के अलावा अन्य कार्यों की भरमार पर कवि राकेश मिश्रा ने तीखी व्यंग्यात्मक कविता पड़ी। इसरत ग्वालियरी ने जीवन संघर्ष पर बेहतरीन गजल पेश की ऐंसे रहते हैं आज हम घर में, जैंसे दांतों के दरमियान जुवां। अजय जैन अविराम ने पिता पर गीत को खूब सराहा गया रुंधे रुंधे गले रहे, आँख से बिना बहे, नि: शब्द ही सदा बहे, जिन्हें पिता जहाँ कहे। कल्पाना सिनोरिया ने गजल व गीत पढकर सभी का आशीर्वाद पाया। शिक्षाविद एमएस दिवेदी ने अपने स्व तंत्रा सेनानी पिता स्व ; राधेश्यागम दिवेदी की पिता पर लिखी कविता पढकर उन्हेंत नमन किया। डॉक्टार महेन्द्र अग्रवाल ने दोहे सुना कर गोष्ठीव को उंचाइयों पर पहुंचाया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टवर निसार अहमद ने उसूलों पर बने रहने की सीख देने वाली गजल पेश की।

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