सीता नवमी को शासकीय स्तर पर माता जानकी प्राकट्य दिवस घोषित करने की उठाई मांगशिवपुरी- जिला मुख्यालय पर अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना के तत्वावधान में एक अत्यंत भव्य, दिव्य और अनुशासित मां जानकी सम्मान पदयात्रा गरिमामयी ढंग से संपन्न हुई। यह पावन पदयात्रा शहर के मां जानकी लव-कुश पार्क से प्रारंभ होकर प्रमुख मार्गों से गुजरी। यात्रा के दौरान संपूर्ण वातावरण माता जानकी के सम्मान में-जानकी सेना मैदान में के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। हाथों में ध्वज और हृदय में माता सीता के प्रति अगाध श्रद्धा लिए सैकड़ों जानकी सैनिक पूर्ण अनुशासन के साथ पंक्तिबद्ध होकर चल रहे थे। शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर और मालाएं पहनाकर पदयात्रा का भव्य स्वागत किया। पदयात्रा जब कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, तो वहां कलेक्टर अर्पित वर्मा की उपस्थिति में महिला इकाई की जिलाध्यक्ष अनुषा भटनागर ने ज्ञापन का वाचन किया। ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार, प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल से सर्वसम्मति से मांग की गई कि सीता नवमी (माता जानकी प्राकट्य दिवस) को शासकीय स्तर पर आधिकारिक रूप से घोषित और मान्य किया जाए।
चरित्र निर्माण से मिटेंगी सामाजिक विसंगतियां
इस अवसर पर जानकी सेना संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत ने अभियान के व्यापक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि शासकीय स्तर पर यह पर्व मनाया जाएगा, तो घर-घर में माता जानकी के पावन चरित्र की चर्चा होगी। नारी सम्मान में वृद्धि होगी जब हमारी आने वाली पीढ़ी माता सीता के त्याग, चरित्र और स्वाभिमान को अपने जीवन में ढालेगी, तो समाज में बेटियों और बहनों को लेकर पनप रही विसंगतियां स्वत: समाप्त हो जाएंगी पूजा-अर्चना और उनके आदर्शों का चिंतन समाज में छिन्न-भिन्न हो रहे नैतिक मूल्यों व संस्कारों को पुनर्जीवित करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राधा अष्टमी, हनुमान जयंती, महाशिवरात्रि और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे महापर्व घर-घर में उल्लास के साथ मनाए जाते हैं, उसी प्रकार माता जानकी प्राकट्य दिवस को भी शासकीय मान्यता मिलनी चाहिए। माता सीता केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में शील, धैर्य, मर्यादा और सहनशीलता की पराकाष्ठा हैं।

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