यूआईटी आरजीपीवी में 30 दिन 30 कार्यशाला अभियान की 16वीं कार्यशाला सम्पन्नशिवपुरी। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में चलाए जा रहे 30 दिन 30 कार्यशाला अभियान के अंतर्गत 16वीं कार्यशाला यूआईटी आरजीपीवी इंजीनियरिंग कॉलेज, शिवपुरी में आयोजित की गई। कार्यक्रम प्रभारी प्रियंका यादव के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में 60 इंजीनियरिंग विद्यार्थियों ने सहभागिता की और जीवन की घटनाओं, प्रतिक्रियाओं, समस्याओं, जिम्मेदारियों एवं आनंद के विभिन्न पहलुओं पर 'अल्पविराम" के माध्यम से आत्मचिंतन किया।
कार्यशाला में ब्रजेश सिंह तोमर ने घटना, प्रतिक्रिया और परिणाम के संबंध को समझाते हुए कहा कि घटना पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन उस पर हमारी प्रतिक्रिया हमारे नियंत्रण में होती है। सकारात्मक प्रतिक्रिया सकारात्मक परिणाम की दिशा में ले जा सकती है। इसलिए किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देने से पहले अल्पविराम लेकर ठहरना और विचार करना जरूरी है। पीएनबी से प्रीति तिवारी ने 'जीवन की समस्या एवं समाधानÓ सत्र में प्रतिभागियों को अपनी समस्याओं पर अल्पविराम देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान की पहल स्वयं से करना आवश्यक है।
मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित एवं प्रमोद रावत ने 'भारत में हूं न" सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को अधिकारों के साथ अपने नैतिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया। साथ ही 'हमारे आसपास की समस्याओं का जिम्मेदार कौन है?Ó प्रश्न पर अल्पविराम लेकर स्वयं की भूमिका पर विचार कराया। कार्यशाला का शुभारंभ प्राचार्य एस.के. धाकड़ ने कार्यशाला टीम के साथ 'हमको मन की शक्ति देना" प्रार्थना से किया। सुषमा कन्नौजी ने आनंद संस्थान का परिचय देते हुए उसकी स्थापना एवं उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
राजेश पटेल ने 'आनंद की ओर" सत्र में विद्यार्थियों को जीवन में आनंद के बढऩे और घटने के कारणों पर अल्पविराम लेने के लिए प्रेरित किया तथा निरंतर आनंद में जीने की प्रक्रिया पर आत्मचिंतन कराया। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किसी भी घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय ठहरकर विचार करने का छोटा-सा 'अल्पविरामÓ जीवन के परिणामों की दिशा बदल सकता है।


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