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Friday, February 13, 2026

कभी जीवन में अभिमान नहीं पाले बल्कि सरल बनकर जीवन जीऐं : डॉ.गिरीश जी महाराज




श्रीबांकड़े हनुमान मंदिर पर अष्टोत्तरशत श्रीमद् भागवत कथा में भगवान की लीलाओं का हुआ वर्णन

शिवपुरी- एक बार जब इन्द्र को अभिमान हो गया तब ठाकुर जी ने बृजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया, यह लीला इंद्र के अहंकार को तोडऩे (अहंकार नाश) के लिए की गई थी और इन्द्र के अभिमान को तोड़ा, यह तो इन्द्र थे लेकिन मनुष्य तो मानव जीवन जी रहा है इस मानव जीवन में कभी अभिमान नहीं पाले बल्कि जीवन को सरल बनाऐं जो जीवन को सरल बनाएगा निश्चित रूप से प्रभु उसकी सुनेंगें और भक्ति का यह मार्ग सद्गति प्रदान करेगा। मनुष्य के अभिमान को तोड़कर सरल जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त किया शहर से करीब 10 किमी दूर स्थित अति प्राचीन श्रीबांकड़े हनुमान मंदिर प्रांगण में जहां श्रीबांकड़े बिहारी शिक्षा एवं विकास समिति शिवपुरी के तत्वाधान में व्यासपीठ से प्रसिद्ध श्रीमद् भागवत कथा मर्मज्ञ डॉ.गिरीश जी महाराज ने जिन्होंने कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से मनुष्य को धर्म का मार्ग प्रशस्त किया।

इस अवसर पर कथा प्रारंभ से पूर्व श्रीमद् भागवत कथा पूजन कथा यजमान प्रधान यजमान श्रीमती किरण-पं. घनश्याम उपाध्याय एवं यज्ञ यजमान श्रीमती नीतू-प्रकाश सोनी नगर अध्यक्ष, बजरंग दल संगठन शिवपुरी के द्वारा किया गया, इसके साथ ही यजमान के रूप में श्रीमती हेमलता-रघुवीर रावत अध्यक्ष जनपद पंचायत शिवपुरी, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव यजमान के लाभार्थी श्रीमती प्रेमदेवी-महेश शिवहरे, भगवान श्रीगोवर्धन पूजन के यजमान श्रीमती हेमलता-पं.मुकेश पाराशर एवं श्रीरूकमणी मंगल विवाह के यजमान श्रीमती प्रियंका-गिरजेश श्रीवास्तव पटवारी के द्वारा भी कथा प्रांगण में शामिल होकर कथा पूजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया गया। कथा में श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, गोवर्धन पूजा, रासलीला और कंस वध आदि प्रसंगों की कथा का वृतान्त श्रोताओं को श्रवण कराया गया। 

इसके साथ ही श्री विष्णु महायज्ञ में भी कथा यजमानों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चरण के माध्यम से आचार्य श्रीबांकड़े मंदिर महंत गिरिराज जी महाराज के पावन सानिध्य में आहुतियां दी गई। इसके साथ ही कथा में महारास लीला भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के साथ महारास का वर्णन सुनाया जिसमें बताया कि यह लीला भक्त और भगवान के दिव्य प्रेम का प्रतीक है। गोपियों का प्रेम कथा में यह बताया जाता है कि गोपियों का प्रेम निस्वार्थ और सर्वोच्च है, जहाँ वे कृष्ण को अपने अंदर महसूस करती हैं। इस अवसर पर नगर के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि आदि के द्वारा भी कथा पाण्डाल में पहुंचकर कथा को श्रवण किया गया। समस्त धप्रेमीजनों से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल श्रीबांकड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह कथा यजमान परिवार के द्वारा किया गया है।  

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