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Friday, August 21, 2026

तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना में प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार के नाम से स्थापित होगी पीठ : प्रो.किशन यादव


प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान समारोह में वाइस चांसलर प्रोफेसर यादव ने की घोषणा

शिवपुरी-प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार सर ने खुद को तिल-तिल जलाकर अपना सब-कुछ देश और समाज के लिए, विद्यार्थियों के जीवन-निर्माण के ध्येय में खपा दिया। किसी भी शिक्षक की असली पहचान उनके द्वारा जीवन निर्माण किए गए विद्यार्थी होते हैं. उक्त उद्गार क्रांतिवीर तात्या टोपे यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर किशन यादव ने प्रोफेसर चन्द्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान समारोह 2026 को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि यहाँ कार्यक्रम में आने के बाद आज जब मैंने प्रोफ़ेसर चन्द्रपाल सिंह सिकरवार सर के व्यक्तित्व और उनके जीवन के शिक्षा क्षेत्र में महनीय योगदान के बारे में जो कुछ सुना है उससे मुझे लगता है कि उनकी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाये रखने के लिए उनके नाम से एक पीठ क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय में स्थापित की जानी चाहिए।

         कार्यक्रम में अध्यक्षीय भाषण देते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में अपने शिक्षक की प्रेरक शक्ति को जीवन भर याद रखता है. आज हम जो कुछ भी हैं वे अपने शिक्षकों के द्वारा एक शिल्पकार के रूप में हमें जिस प्रकार ढाला गया उसी की परिणति हैं. उन्होंने प्रोफ़ेसर सिकरवार के जीवन के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के जीवन निर्माण में एकनिष्ठ साधना और समर्पण का जो गौरवपूर्ण जीवन उन्होंने जिया है वह अप्रतिम है। प्रोफ़ेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार की स्मृति में कोई स्थायी कार्य किया जाना चाहिए, ऐसी अपेक्षा उन्होंने व्यक्त की और तात्या टोपे यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर किशन यादव के प्रोफ़ेसर सिकरवार की स्मृति में विश्वविद्यालय में एक पीठ स्थापित किए जाने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में उनका भी जो संभव सहयोग हो सकेगा उसके लिए वे सहर्ष तैयार हैं। 

प्रोफ़ेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान समारोह को विशिष्ट अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक प्रहलाद भारती की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन प्रोफ़ेसर दिग्विजय सिंह सिकरवार ने किया। स्वागत भाषण केशव शर्मा द्वारा एवं प्रोफ़ेसर सिकरवार के जीवन वृत्त का रेखांकन प्रोफ़ेसर पल्लवी गोयल द्वारा जबकि आभार भरत भार्गव ने व्यक्त किया।ओमप्रकाश दीक्षित को निःशुल्क ओपन पाठशाला संचालन के लिए प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान से किया गया सम्मानित :-
             ग्वालियर में झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का काम ओमप्रकाश दीक्षित पिछले 07 वर्ष से कर रहे हैं. 31 दिसंबर 2019 को 'व्याख्याता' के पद से सेवानिवृत्त होने के केवल 10 दिन बाद जब दीक्षित हरिशंकरपुरम से विवेकानंद नीड़म की ओर सैर पर निकले, तो रेलवे क्रॉसिंग के पास बुंदेलखंड के मजदूर परिवारों के बच्चों को खेलते देखकर उन बच्चों से पढ़ने की इच्छा पूछी और उनके अभिभावकों से बात की. रेलवे गेटमैन ने पीछे की एक दीवार दे दी. पेंट, चॉक और डस्टर लेकर ओमप्रकाश दीक्षित वहाँ पढ़ाने पहुँच गए. दीवार पर पेंट करके बोर्ड बनाया और पढ़ाना शुरू कर दिया. शुरुआत 12 बच्चों से हुई. ओपन पाठशाला में सिंधिया नगर स्लम एरिया से 80-90 बच्चे आने लगे. इस प्रकार दीक्षित के ओपन पाठशाला के इस मिशन की शुरुआत जनवरी 2020 में पहली ओपन पाठशाला से हुई. रिटायरमेंट के 07 वर्ष बाद आज भी ओमप्रकाश दीक्षित 69 वर्ष की उम्र में हर रोज सुबह 4:30 बजे उठकर सुबह 6:15 बजे तक पूजा-पाठ करके अलग-अलग स्थानों पर संचालित ओपन पाठशालाओं में पढ़ाने के लिए निकल पड़ते हैं,  11:00 बजे तक घर पहुंचते हैं. भोजन और थोड़ा विश्राम करने के बाद आप शाम को 04:30 बजे से फिर अलग-अलग स्थानों तक बच्चों को पढ़ाने के लिए शहर के विभिन्न कोनों में अलग-अलग ओपन पाठशालाओं में पहुँचकर बच्चों को पढ़ाते हैं. वर्तमान में ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में कुल 14 निशुल्क पाठशालाएं ओमप्रकाश दीक्षित के सेवार्थ जनकल्याण न्यास के माध्यम से संचालित हैं. अलग-अलग स्थानों पर संचालित इन सभी ओपन पाठशालाओं में करीब 800-900 बच्चे बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. दिसंबर 2019 में शासकीय सेवा से निवृत्त होने के बाद, आराम का जीवन चुनने के बजाय ओमप्रकाश दीक्षित ने अपना पूरा समय झुग्गी-झोपड़ियों और मजदूर वर्ग के बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दिया है. आपका एक छोटा सा व्यक्तिगत प्रयास ग्वालियर में आज एक बड़े सामाजिक प्रकल्प का स्वरूप ले चुका है. ग्वालियर के विभिन्न सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को ओमप्रकाश दीक्षित 'एक्टिव लर्निंग मेथोडोलॉजी' की ट्रेनिंग भी देने का काम भी करते हैं. 

सुरेंद्रपाल सिंह कुशवाह को बैंकिंग सेवा में ग्राहकों के हित में निष्ठापूर्ण सेवा और बच्चों को निःशुल्क शैक्षणिक मार्गदर्शन के लिए किया गया स्मृति सम्मान से सम्मानित :-
        ग्वालियर निवासी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सुरेंद्रपाल सिंह कुशवाह को बैंकिंग सेवा के दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वहन, विद्यार्थियों को निःशुल्क शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करने के उल्लेखनीय योगदान एवं साहित्य सृजन के माध्यम से मानवीय मूल्यों की जागृति में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रोफेसर चन्द्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान प्रदान किया गया. सुरेन्द्रपाल सिंह कुशवाह ने अपनी बैंकिंग सेवा के निर्वहन के दौरान किसानों को ऋण-मुक्ति, दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाकर समाज के वंचित और जरूरतमंद लोगों के लिए संबल बनने का काम किया. साहित्य सृजन के माध्यम से सनातन संस्कारों और मानवीय मूल्यों की जागृति में भी सुरेंद्रपाल कुशवाह का महत्वपूर्ण योगदान है. सुरेंद्रपाल कुशवाह द्वारा लिखित  'कोरोना डायरी' पुस्तक में कोरोना त्रासदी के भयावह दौर की पीड़ा, संघर्ष और सेवाभाव का जीवंत अभिलेख प्रस्तुत किया गया है. मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का वर्ष 2023 का “प्रादेशिक राजेंद्र अनुरागी पुरुस्कार” इस पुस्तक को प्राप्त हुआ है. सुरेंद्रपाल कुशवाह द्वारा रचित एक अन्य पुस्तक 'बुआ का गाँव' भी मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित हुई है.  इस उपन्यास के माध्यम से सुरेन्द्रपाल कुशवाह ने गाँव के देशज मूल्यों, संस्कारों और वर्तमान परिवेश में लुप्त होती ग्रामीण संस्कृति, निश्छल प्रेम, उत्सवप्रियता और ग्रामीण जीवन के पारंपरिक संस्कारों को उकेरा है.  
            बैंक सेवा के साथ-साथ शिक्षा से सुरेंद्रपाल कुशवाह का गहरा जुड़ाव हमेशा बना रहा. प्रतिदिन चार सत्रों में सुरेंद्रपाल कुशवाह विद्यार्थियों को निःशुल्क अध्यापन कराने के कार्य से जुड़े रहे. प्रतिदिन बैंक जाने के पहले सुबह 06:00 बजे से विद्यार्थियों को पढ़ाना प्रारंभ करते थे. और प्रतिदिन सुबह 03 बैच और शाम को 01 बैच बैंकिंग सेवा के दौरान हमेशा पढ़ाते रहे. 
बैंक सेवा में ग्राहको के हित में नियमों का उपयोग करने में किए गए नवाचारों, प्रयत्नों की पराकाष्ठा और निष्ठा पूर्ण सेवा के लिए सुरेन्द्रपाल सिंह कुशवाह को प्रोफेसर चंद्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति सम्मान प्रदान किया गया.

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